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Writing by....... Tariq 


    Hii दोस्तों केसे हो आप सब मेरा नाम तारिक अली हैं, मैं आगरा ताज नगरी में रहता हूँ, मुझे लोग Lp moon के नाम से जानते हैं हालाकि मेरे कुछ खाश दोस्त मुझे प्यार से इसी नाम से बुलाते है, ये मेरा Facebook name. भी हैं,   मैं बचपन में अपने गाँव जारोली शमशाबाद रहता था, वहाँ पर मेरी पूरी फ़ैमिली रहती है, गाँव में हमारा खेत भी है, खेत में आलू की फसल होती है, गर्मियों में स्कूल की छुट्टियों पर मे बहुत मज़े करता था,  गांव में रहना मुझे बहुत अच्छा लगता था, गांव की बात ही कुछ अलग थी वहाँ के संस्कारी लोग, वहां का माहोल भी बहुत अच्छा था गांव की वो शीतल शुद्ध वायु जो लोगो को जीवन व्यतीत करने में बहुत कारगर थी, वहाँ के आम लोग की बोली व अपने से बढो के प्रति आदर और गाव के लोगो का स्वाभाव बहुत ही बढ़िया था!  
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हा तो मैं अपने गांव की बात बता रहा था, जब में छोटा था, मुझे अपने गाँव की याद अभी भी आती है बचपन, मेरा गांव है😘
प्रकृति तू मेरा बचपन, मेरा गाँव है
कच्ची टिकोलों सी यादें
थोड़ी खट्टी थोड़ी सी मीठी


गाँव की ताज़ी सुबह और वहां का माहौल शहर में रहने वाले लोगों को अपनी ओर खींचता है। हम भले ही अपने गाँवों से बहुत दूर चले आए हों, लेकिन हमारा गाँव से जुड़ाव कभी कम नहीं होता।
अब तो मकानों के बीच थोड़ी प्रकृति बची है
मेरा गाँव तो खूबसूरत प्रकृति में है,
कई ताल और उन में नहाते पंछियों का जोड़ा
साबन के आने से सारा गाँव धूल जाता था
हवा ऐसी की मन खिल जाता था,
दूर तलक खेत, उन खेतों की खुशबू याद है
मिट्टी के घरौंदे, मिट्टी के खिलौनें,मिट्टी में खेल
पेड़ पर चढ़ कर खेलना
पतंगों से भरे आसमान की बाते
सरसों के फूलों से खुद को सजाती थी
तारों के बीच छत पर मैं भी खो जाती थी
तब कहाँ हमें इतनी गर्मी लगती थी'



मेरा बचपन मेरा गाँव 👌

मुझे आज अपना गांव वाला घर खासकर वो बबूल का पेड़ बहुत याद आता है ... वो पेड़ कम और दोस्त ज्यादा था ... सारी दोपहरी उसी बबूल के पेड़🌳 के नीचे गुजरती थी ... अम्मी कितना बुलाती थी अंदर आजा लू लग जाएगी पर नही सारा दिन उसी पेड़ के नीचे चारपाई डाल कर बैठता ..खेेलता🏀 ..और पढ़ता📖 था गर्मी के वो सावन के पहले दिन ही उस पेड़ में झूला डाल देता था और मैं  सारा दिन उसमे झूलता था,दोस्तों के साथ स्कूल जाते समय रास्ते में स्कूल के सामने एक इमली का पेड़ था, उसकी इमली बड़ी खायी झाड़ियों से बेर और करौंदा तोड़ के खाते स्कूल बैग में हमेशा काला नमक और चूरन होता था 😁😁  क्या पता कब इसके साथ खाने को कुछ खट्टा मिल जाये.. तब स्मार्ट फ़ोन📱 बहुत कम थे, पर वो बचपन था कभी किसी मंहगे खिलौने लेने की ना इच्छा हुई न ज़िद  बढ़ी सुकून की जिन्दगी
है बचपन की वो बहुत सी बात है,


                  याद है ,😘

 याद है वो आँखों से कभी ओझल भी नहीं हुई
याद है वो आसमानी रंग की स्कूल की ड्रेस
जिसे पहन कर बचपन के वो खूबसूरत सपने
आसमानों से ऊँची उड़ान भरते थे .....

याद है रास्ते चलते पेड़ो से कच्चे आम तोडना
याद है बारिश के मौसम में भीगते हुए घर जाना ......
याद है 15 अगस्त , 26 जनवरी और
इन दिनों की अहमियत हमारे लिए इसलिए थी
क्योंकि उस दिन स्कूल से लड्डू, फल, चॉकलेट🍫 मिला करती,
याद है वो ईद वाले दिन नए कपड़े पहन कर नमाज़ पढ़ने जाना और अम्मी की बनायी हुयी सेवइया 🍜 और नए-नए पकवान गरमा-गरम
याद है, वो बचपन के दोस्त जिनके साथ खेला करते थे
जिनमे  फ़ुटबॉल, लूडो🎲 किल्ली-डंडा, कंचे, लुक्का-छिपी, और बेडमिंटन 🎾
याद है बचपन की ड्राइंग 🎨
याद है, वो धूप में क्रिकेट खेलना दो-दो घंटे से ज्यादा
याद है, बचपन की मस्ती जो बहुत निराली थी
याद है वो लडकियों के साथ लड़कियों वाले खेल-खेलना👫🚣🏃
याद है वो बचपन में भईया कि साइकिल🚵 चलाना
जिसे चला कर बार-बार साइकिल से गिरना
चोट 😔 लगने पर किसी को ना बताना
याद है वो बचपन की कुल्फी 🍦जो गर्मियों में बड़े ही स्वाद के साथ खाते थे
याद है बचपन के लॉलीपॉप 🍭 का स्वाद जो बढ़ा ही अच्छा लगता था,
बचपन के वो दिन आज भी याद आते है, 😊😊



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